Ghaziabad Sisters Suicide: Dark Side of K-Pop Addiction

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Published 1 month ago by ravi
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गाजियाबाद की दिल दहला देने वाली घटना - तीन बहनों ने ली जान

बुधवार तड़के गाजियाबाद के एक अपार्टमेंट से तीन बहनों ने नौवीं मंजिल से छलांग लगा दी। जो बात सबको चौंका गई, वो थी उनकी आखिरी मांग - पापा, हमें साउथ कोरिया भेज दो नहीं तो हम यहां नहीं रह पाएंगे।

ये तीनों मासूम बच्चियां, जिनकी उम्र सिर्फ ग्यारह से सोलह साल थी, Korean pop stars की इतनी बड़ी फैन बन चुकी थीं कि असली जिंदगी उन्हें बेमानी लगने लगी थी। रोज-रोज कोरियाई गाने सुनना, सीरियल देखना, और Korean भाषा सीखने की कोशिश करना - यही उनकी दुनिया बन चुकी थी। घरवालों से बात करना भी उन्हें अच्छा नहीं लगता था।

सबसे खतरनाक बात ये थी कि वो एक ऑनलाइन गेम में फंस गई थीं। इस गेम में अलग-अलग टास्क पूरे करने होते थे और आखिरी चैलेंज जान देने का था। बच्चियों को लगा कि ये सिर्फ गेम है, मगर नतीजा सामने है।

माता-पिता ने जब उनकी बढ़ती लत देखी तो मोबाइल छीन लिया। मगर बहुत देर हो चुकी थी। बच्चियों के दिमाग में वर्चुअल दुनिया इतनी घर कर चुकी थी कि वो वापस नहीं आ सकीं। आज एक परिवार उजड़ गया, तीन जानें चली गईं, और समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया - क्या हम अपने बच्चों को डिजिटल दुनिया के हवाले छोड़ देंगे? Read more

Published on 2026/02/06. Modified on 2026/02/06.

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गाजियाबाद की दिल दहला देने वाली घटना - तीन बहनों ने ली जान

बुधवार तड़के गाजियाबाद के एक अपार्टमेंट से तीन बहनों ने नौवीं मंजिल से छलांग लगा दी। जो बात सबको चौंका गई, वो थी उनकी आखिरी मांग - पापा, हमें साउथ कोरिया भेज दो नहीं तो हम यहां नहीं रह पाएंगे।

ये तीनों मासूम बच्चियां, जिनकी उम्र सिर्फ ग्यारह से सोलह साल थी, Korean pop stars की इतनी बड़ी फैन बन चुकी थीं कि असली जिंदगी उन्हें बेमानी लगने लगी थी। रोज-रोज कोरियाई गाने सुनना, सीरियल देखना, और Korean भाषा सीखने की कोशिश करना - यही उनकी दुनिया बन चुकी थी। घरवालों से बात करना भी उन्हें अच्छा नहीं लगता था।

सबसे खतरनाक बात ये थी कि वो एक ऑनलाइन गेम में फंस गई थीं। इस गेम में अलग-अलग टास्क पूरे करने होते थे और आखिरी चैलेंज जान देने का था। बच्चियों को लगा कि ये सिर्फ गेम है, मगर नतीजा सामने है।

माता-पिता ने जब उनकी बढ़ती लत देखी तो मोबाइल छीन लिया। मगर बहुत देर हो चुकी थी। बच्चियों के दिमाग में वर्चुअल दुनिया इतनी घर कर चुकी थी कि वो वापस नहीं आ सकीं। आज एक परिवार उजड़ गया, तीन जानें चली गईं, और समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया - क्या हम अपने बच्चों को डिजिटल दुनिया के हवाले छोड़ देंगे?

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